अपना झाबुआ
आर एक्स दिव्यांशु,जिनका वास्तविक नाम दिव्यांशु पाटीदार है,वे मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के ग्राम करवड़ में निवास करते हैं।वे अपने पूरे गाँव और आसपास के क्षेत्र के एकमात्र बहु- प्रतिभाशाली कलाकार हैं,जो संगीत,लेखन और कला के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।आर एक्स दिव्यांशु आज के समय के एक उभरते हुए बहु-प्रतिभाशाली कलाकार हैं।वे न सिर्फ एक गीतकार और संगीतकार हैं, बल्कि उन्हें स्केच आर्ट, वीडियो/फोटो एडिटिंग और फिल्म निर्देशन का भी गहरा ज्ञान है। आर एक्स दिव्यांशु की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अपने गीत खुद लिखते हैं,खुद संगीत तैयार करते हैं और पूरे रचनात्मक प्रोसेस में पूरी तरह शामिल रहते हैं।उनका मानना है कि सच्ची कला वही होती है, जो दिल से निकले और सीधे श्रोताओं के दिल तक पहुँचे।आर एक्स दिव्यांशु ने अब तक मुख्य रूप से प्रेम गीत और दुःख भरे गीत लिखे और बनाए हैं।उनके गीतों में भावनाओं की गहराई, सच्चाई और सादगी साफ दिखाई देती है।हाल ही में उनके तीन नए गीत रिलीज़ हुए हैं।
• तेरी आवाज़ में जादू है
• कुछ तो है तेरे दिल में
• इंकार
ये सभी गीत Apple Music, Spotify, Gaana, Amazon Music और JioSaavn जैसे बड़े और प्रोफेशनल म्यूज़िक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं,जो उनकी मेहनत और गुणवत्ता का प्रमाण हैं।आर एक्स दिव्यांशु की सोच हमेशा सकारात्मक और जिम्मेदार रही है।वे अपने गीतों में कभी भी ऐसी बातें नहीं लिखते, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचे।उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं,बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है।वे अपने गीत का श्रेय अपने मित्र शुभम गुप्ता को भी देते है।आर एक्स दिव्यांशु आगे चलकर देशभक्ति गीत और भजन लिखने की भी इच्छा रखते हैं,ताकि वे अपने संगीत के माध्यम से समाज और देश के लिए कुछ सार्थक योगदान दे सकें।आर एक्स दिव्यांशु सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं।वे इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर Rx Divyanshu नाम से मौजूद हैं,जहाँ वे अपने संगीत,रचनात्मक कार्य और कला से जुड़ी सामग्री साझा करते हैं।आर एक्स दिव्यांशु का मानना है कि उनकी इस कला और सफलता का पूरा श्रेय उनके माता-पिता को जाता है।उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया, हर क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कभी भी उनकी रचनात्मक सोच को रोकने का प्रयास नहीं किया।वे गर्व के साथ कहते हैं कि “मैं आज जो कुछ भी हूँ,वह अपने माता-पिता के समर्थन,विश्वास और संस्कारों के कारण हूँ।”





